मोहन के गोपाल
एक सफर  ट्रेन में
 *छंट गया कोहरा*
"कन्याओं की हड़ताल"
प्रेयसी दो अंतिम बार विदा - यह सेवक ऋणी तुम्हारा है
 निर्णय
जब ट्रेन रवाना हुई
 मैं आती रहूँगी माँ
वो गवाँर है