निर्णय

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कोरोना का कहर सभी जगह व्याप्त है काफी घर इसमें भी घर हो रहे हैं और कमाने वाला व्यक्ति के जाने के बाद घर की आर्थिक स्थितियां बहुत खराब हो रही है नेहा और राजेश ने लव मैरिज की थी घर से भागकर की गई शादी जिसमें गृहस्थी का एक-एक सामान खुद को खरीदना पड़ता है, 

ना ही लड़की के मां-बाप साथ देते हैं और ना ही लड़के के मां-बाप, अभी उनकी शादी को 3 साल ही हुए थे राजेश एक प्राइवेट ऑफिस में काम करता था और नेहा एक प्राइवेट फर्म में काम करती थी, दोनों मिलकर इतना कमा रहे थे, कि उनकेघर की गाड़ी चल रही थीं, 

अचानक इस कोरोना के कहर से राजेश की मौत हो जाती है , नेहा ने अपने मायके और पीहर में मददके लिए कहा, लेकिन कोई भी तैयार नहीं हुआ, उसके अपनी एक बेटी है, गाड़ी मकान सभी लोन पर थे, उसे पता था कि अब उसकी सैलरी से वह सिर्फ घर का खर्चा और बेटी को पाल सकती है,

 अब उसके पास इन सब चीजों की किश्त चुकाने का कोई साधन नहीं था, राजेश को शांत हुए एक महीना होने वाला है इस बीच उसके पास किसी का भी फोन नहीं आता, कभी कभार दोस्त फोन करके उसका हाल चाल पूछ लेते थे, उस समय ऐसा था सभी लोग परेशान थे,

 कोरोना से हुई मौत के कारण कोई भी उसके घर नहीं आ रहा था धीरे-धीरे समय बीता जा रहा था, वह समझ नहीं पा रही थी कि आगे का जीवन उसका कैसे निकलेगा सबसे ज्यादा उसे चिंता थी, कि अगर गाड़ी और मकान का किस्त नहीं भरा तो एक दिन यह मकान और घर का समान उसके हाथ से चला जायेगा, ससुराल वाले तो उसे फोन पर अपनी बेटी की मौत का जिम्मेदार ठहराते हैं उसे पता था,

 कि उसका कोई भी साथ नहीं देगा मायके में मां पिता भी कोरोना से जा चुके थे, सिर्फ वहां भाई और भाभी थे जिन्हें नेहा फूटी आंख नहीं सुहाती थी और अक्सर उसे कहते  थे, कि तेरी इन आदतों के कारण हमें हमारे बच्चों पर भी तेरे गलत आचरण का फर्क़ पड़ेगा, 

नेहा यह बात अच्छी तरह समझती थी कि यह सब तो बहाना है उसके भाई और भाभी को डर था कि कहीं पापा रिटायरमेंट के मिले पैसों को नेहा को ना दे दे, उस पैसों से भैया और भाभी को बड़ी उम्मीदें थी, कई साल पहले से वह उन पैसों की प्लानिंग मकान को खरीदने की थी।



पहले भाग में पड़ा कोरोना से जूझता हुआ नेहा का हस्बैंड खत्म हो जाता है, और उसे मायके और ससुराल की कोई मदद नहीं मिलती। 

अब गतांक से आगे


भाग 2


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जिस फार्म में वह काम करती थी, एक दिन वह उनके मालिक के घर गई, और उनसे एडवांस सैलेरी की मांग की, और उसने कहा, कि उसको मिलने वाली सैलरी में से धीरे-धीरे वह इन पैसों को चुका देगी। 

बॉस की बीवी मन की बहुत अच्छी थी, उसने नेहा को बिठाकर एक बड़ी बहन की तरह आश्वासन दिया और उससे कहा कि तुम्हें किसी भी चीज की परेशानी आती हो तो तुम बेझिझक आकर बता देना, ऐसे समय में हमारी कंपनी के एंप्लाइज की मदद करना हमारा कर्तव्य है, 

और नेहा से नेहा के बारे में जानती हैं तो उनके मन में नेहा के प्रति और दया भाव आ जाता है, नेहा उन्हें धन्यवाद कहकर और अपनी बेटी को लेकर एडवांस से जरूरी सामान लेकर अपने घर आ गई, और सोचने लगी कि मैडम कितनी अच्छी है 

उनके मन में कितना दया भाव है, धीरे-धीरे बॉस की बीवी के फोन कभी कभी नेहा के पास  आने लगे, और वह हमेशा उससे कहती थी कि किसी भी चीज की परेशानी हो तो परेशान ना होना मुझे बता देना। नेहा और बॉस की बीवी में अब धीरे-धीरे छोटी और बड़ी बहन का रिश्ता  बन गया था, अब बॉस की बीवी कभी कभी नेहा के घर आने लगी थी, 

नेहा की खूबसूरती की अक्सर वो तारीफ करती थी, और उसके लिए कभी-कभी सुंदर सी ड्रेस भी लाती थी और उसकी बेटी को भी बहुत प्यार करती थी, 

1 दिन नेहा के घर के पास किसी का मर्डर हो जाने के कारण कर्फ्यू लगने की नौबत आ जाती है, और बार-बार नेहा को पुलिस वाले भी कुछ सवाल पूछ कर परेशान करने लगे, बॉस की बीवी से यह बात शेयर करती , तो वह ड्राइवर भेज कर नेहा को अपने घर बुलवा लेती है, , 

 बॉस और उनकी पत्नी दोनों ही नेहा और उसकी बेटी का बहुत ख्याल रखते थे धीरे-धीरे नेहा भी उनके साथ घुलमिल गई और उनके घर पर बेझिझक होकर उनके घर का काम भी करने लगी थी, 

 बॉस को कोई बच्चा नहीं था, एक दिन उसने बातों बातों में पूछा कि आप विज्ञान की इस आधुनिक तकनीक के द्वारा मां क्यों नहीं बन जाती। 

तब बॉस की बीबी ने कहा कि नेहा मेरेuters मैं सडाव लग जाने के कारण शादी के 2 साल के बाद ही मुझे निकलवाना पड़ा पर यह बात मैं और मेरे पति के अलावा कोई नहीं जानता अनाथ आश्रम से बच्चा तो ले ले,, पर मेरी ससुराल वाले उसे स्वीकार नहीं करेंगे, 

नेहा को यह सुनकर बड़ा दुख होता है और ईश्वर की मर्जी जानकर वह उस बात को यहीं खत्म कर देती है



दूसरे भाग में आपने पढ़ा नेहा अपने बॉस की बीवी  से आकर्षित होकर उन्हें अपनी बड़ी बहन की तरह देखती थी, और उनसे शादी कितने साल बाद तक बच्चा ना होने का कारण जानती है तो मन ही मन दुखी होती है। 

अब आगे


भाग 3


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नेहा और बॉस की बीबी की बहुत अच्छी पटने लगी थी, और नेहा उन्हें अपनी बड़ी बहन की तरह ही मानने लगी थी, एक दिन बॉस की बीबी ने नेहा से बातों बातों में उससे पूछा, फ्यूचर में तुम मकान और गाड़ी की किस्त कैसे चुका पाओगी,

 और इस बच्ची के लिए अच्छी शिक्षा एक छोटी सी नौकरी से संभव है, नेहा तुम सुन्दर हो, उमर भी कम, दूसरी शादी कर लेना चाहिए, नेहा ने हंसकर कहा कि मेरी इस बच्ची को रखने वाला कोई नहीं है, ना ही उसके नाना नानी है, और ना ही दादा दादी का परिवार, मैं अपनी इस बच्ची को जीते जी अनाथ नहीं कर सकती, 

और मैं अपनी सारी जिंदगी अपनी इस बेटी के साथ निकाल लूंगी मुश्किलें जरूर आएंगी मुझे, लेकिन धीरे-धीरे कोशिश करूंगी अगर मकान की किस्त नहीं चुका पाए, तो मकान और गाड़ी वापस कर देंगे कहीं किराए के मकान में अपनी जिंदगी निकाल लूंगी, 

बॉस की बीवी ने 1 दिन कहा कि अगर तुम्हारा मकान गाड़ी और इसकी एजुकेशन की चिंता से तुम्हे मुक्त कर दे, तो नेहा ने कहा क्या कोई जादू की छड़ी है, जिसको घुमाने के साथ ही मेरी सारी चिंताएं दूर हो जाएंगी, 

और हंसकर कहने लगी कि आप जैसे लोगों को यह सब कहना आसान लगता है, क्योंकि आपके पास बहुत पैसा है, हम एक-एक पेसा को जोड़कर घर बनाते हैं, अपने बच्चों के लिए। बॉस की बीवी ने कहा मैं यह सब तुम्हें मुफ्त में नहीं दे रही हूं, 

मैं तुमसे इसके बदले में कुछ चाहती हूं, नेहा हैरान होकर उन्हें देखने लगी उसने कहा कि मैं आपको क्या दे सकती हूं, मेरे पास तो कुछ भी नहीं है, 

उन्होंने कहा तुम मुझे बच्चा दे सकती हो। 

नेहा घबराकर अपनी बेटी को अपने से चिपका लेती है, और कहती है यह आप क्या कह रही हो दीदी, मैं अपनी बेटी आपको नहीं दे सकती, और अपनी बेटी को गले से कसकर चिपका कर रोने लगती है। 




भाग तीन में आपने पढ़ा कि नेहा अपने बॉस की बीवी की बात को समझ कर घबरा जाती है और उसे लगता है जी बॉस की बीवी अंजलि उससे उसकी बेटी रोजी को लेना चाहती हैं और वह अपने घर आ जाती है

आगे

भाग 4

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बॉस की बीवी के साथ इस वार्तालाप के बाद बड़े भारी मन के साथ नेहा अपनी बेटी को लेकर घर आ जाती है लेकिन उसका मानसिक द्वंद लगातार चलता रहता है बहुत सारी बातें उसके मन में नकारात्मक होती हैं और बहुत सारी बातें सकारात्मक, 

उस अन्तर मन विचारो के साथ साथ उसे फिर से अपनी बेटी का भविष्य मकान यह सब नजर आने लगता है, उसे लगता है कि उसकी बेटी अब जब स्कूल जाने लगेगी तब उसके ऊपर जिम्मेदारियों के साथ-साथ आर्थिक भार भी बढ़ जाएगा उसे पूरी पूरी रात नींद नहीं आती और अक्सर वह यह सोचती रहती है,

 मैं ऐसा करके राजेश के साथ अन्याय तो नहीं करूंगी, कई बार वह राजेश की फोटो के सामने बैठकर बहुत रोती है, खूबसूरत होने के कारण लोगों की निगाहों को पढ़ना भी उसे बहुत अच्छी तरह आता था, पढ़ी-लिखी तो थी, तो वह जानती थी,

 कि कहीं दूसरी जगह जॉब के लिए जाएगी तो वहां उसे क्वालिफिकेशन के दम पर नहीं बल्कि खूबसूरत जिस्म के कारण आसानी से नौकरी मिल जाएगी और उसे अपने बारे में यह तो पता ही था कि मैं उसके पास कोई टेक्निकल एजुकेशन नहीं है तो कोई हाई-फाई नौकरी तो मिलने से रही, 

यह सोच सोच कर वह काफी परेशान होने लगी शादी जल्दी कर लेने के कारण वह मात्र 25 साल की उम्र में विधवा हो गई थी, उसे यह भी पता था कि इतनी बड़ी जिंदगी बिना सपोर्ट के नहीं निकल पाएगी, लगने लगा कि अगर उसे फैसला करना है तो जल्दी लेना पड़ेगा, 

डोर बेल की आवाज से उसकी नींद खुलती है वह घड़ी में देखती है कि अभी 9:00 बज गए आज तो उठने में देर हो गई शायद दूध वाला आया होगा, वह जैसी ही गेट खोल दी है तो सामने बॉस की बीवी अंजलि को पाती है, गुड मॉर्निंग करने के बाद वह अंजलि को अंदर लेकर आती है, 

बिना किसी भूमिका के अंजलि अपनी बात शुरू करती है वह कहती है कि नेहा मेरी बात का तुम्हें बुरा लगा हो तो मैं माफी चाहती हूं मैं चाहती हूं कि तुम्हारा और रोजी का रिश्ता मेरे साथ पहले जैसा बना रहे, इस बात को हम दोनों यहीं खत्म करते हैं, 

नेहा अंजलि से कहती है दीदी मैंने भी शायद पूरी बात सुने बिना अपना रिएक्शन जल्दी दे दिया और मेरी कहने का तरीका भी गलत था, अगर हम दुबारा अपनी उसी चर्चा को एक बार और डिस्कस करें तो बेहतर होगा, 

अंजलि कहती है कि नेहा सेरोगेसी मदर के लिए मैंने कहा था,  तुमसे तुम्हारी कोख किराए पर चाहती हूं, उसके बदले में तुम ही तुम्हारी पूरी कीमत दी जाएगी,   लोन पटा दिए जाएंगे, रोजी की एजुकेशन का पूरा इंतजाम कर दिया जाएगा, 

फ्यूचर में तुम्हें कोई कष्ट ना हो मैं इस बात का भी पूरा ध्यान रखूंगी, और कुछ देर बाद अंजलि नेहा के घर से चली जाती है और उसी कहती है, मैं शाम को 4:00 बजे आऊंगी तुम्हारा जो भी फैसला हो अगर हां मैं हूं तो मेरे साथ डॉक्टर के पास चलना, 

और अगर ना मे हो इस बात को यहीं खत्म करके रोटी और तुम मेरे दिल के पहले जितनी ही करीब रहोगी, राजेश की तस्वीर के सामने बैठकर नेहा बहुत रोती है और कहती है राजेश तुम क्यों चले गए, मैं इतनी बड़ी जिंदगी तुम्हारे बिना कैसे गुजार पाऊंगी 

अगर मैं अकेली होती तो कब की तुम्हारे पास आ जाती लेकिन मेरे पास तो तुम्हारी निशानी है जिसका मुझे खयाल रखना है मुझे समझ में नहीं आ रहा कि मेरे फैसले सही या गलत होंगे, लेकिन एक तो कोरोना की मारामारी दूसरा मैं इतनी ज्यादा भी कोई शिक्षित नहीं हूं , 

जो मुझे एक शानदार जॉब मिल जाए मुझे पता है कि सभी मुझे दूसरी शादी करने की सलाह देंगे , मेरे पास तुम्हारे अलावा ऐसा कोई भी शख्स कभी नहीं रहा, जिससे मैं अपने मन की बात कर सकूं 

मेरे लिए क्या सही है क्या गलत है वह मुझे बता सके अल्प बुद्धि में जो भी मुझे आता है मैं वह कर लेती हूं और अब तो हकीकत यह है कि सिर्फ मैं तुमसे बातें कर सकती हूं तुम नहीं,

रोजी के रोने से उसे ख्याल आता है कि आज तो उसने भी सुबह से कुछ नहीं खाया और  रोजी को भी कुछ नहीं खिलाया वह उठकर अपने और रोजी के खाने का इंतजाम करने लगती है  !

बहु त सोच विचार के वह नतीजे पर पहुंचती है, और 4:00 बजने का इंतजार करने लगती है।




अब तक आपने पढ़ा अंजलि को नेहा के द्वारा मां बनना है यानी सेरोगेसी मदर नेहा कोई डिसीजन नहीं दे पाती इसलिए वह घर आ जाती है कुछ समय बाद जब अंजलि नेहा के घर आती है तो वह उसे दुबारा समझाने की कोशिश करती है और नेहा को कुछ समझ में आता है और वह अपना निर्णय लेती है अब इसके आगे

भाग 5

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शाम को 4:00 बजे अंजली आती है  ।और नीचे से आवाज़ देती है , अंजलि की आवाज सुनकर  नेहा बाहर आती है ,और एक खूबसूरत सी मुस्कुराहट के साथ उसका वेलकम करती है , नेहाखुद भी तैयार थी ,और रोजी भी तैयार थी, 

 अंजलि भी प्यारी सी मुस्कान के साथ से नेहा कहती है ,आज तुम बहुत सुंदर लग रही हो, कार का दरवाजा खोलती हुई अंजलि रोज़ी को गोद में लेकर नेहा को अंदर बैठने का इशारा करती है, दोनों ही बिना बोले पूरा  सफर तय करती है, 

अंजलि रोज़ी को खिलाने में मस्त रहती है ,और टॉफी देकर उसको हसाती रहती है ,इसी बीच दोनों क्लीनिक पहुंच जाते हैं रोजी को ड्राइवर के पास छोड़कर दोनों अंदर जाती हैं ,नेहा को ऐसा लग रहा था या तो पहले से अपॉइंटमेंट ले रहा है ,या फिर शायद यह कोई उनकी परिचित डॉक्टर का ही क्लीनिक है ।

अंदर पहुंचने पर डॉक्टर अंजलि का गर्मजोशी से स्वागत करती है ,एक मुस्कान नेहा को देखते हुई उसे बैठने का इशारा करती है,

आपस में उनकी कोई डिटेल चर्चा नहीं होती, वहां पहले अंजलि को लेकर अंदर जाती है और करीब आधे घंटे के बाद वापस आती है ,

यह आधा घंटा नेहा का मन मस्तिष्क फिर से सही गलत के चक्कर में गोता लगाने लगता है ,उसको ऐसा लगता है कि शायद वह गलत कर रही है ,उसे यहां से भाग जाना चाहिए लेकिन हमेशा की तरह फिर वही मकान गाड़ी फ्यूचर सब कुछ उसे नजर आने लगता है ,

और वह  अकेले बैठे हुए ,एक बार फिर वह अपने ससुर को फोन लगाती है , लेकिन वहां से कोई रिस्पॉन्स ही नहीं मिलता, यह बात नेहा मन से निकाल देती है कि वह गलत है ।

थोड़ी समय बाद अंजलि बाहर आ जाती है ,और नेहा अंदर जाती है बाहर श्री कृष्ण जी की फोटो के हाथ जोड़ते हुए अंजलि मन ही मन प्रार्थना करती है कि हे प्रभु अब सब कुछ ठीक हो जाए ,और उसे नेहा के द्वारा मातृत्व का सुख मिल जाए ,जिससे उसे कोई बांझ ना कहे, 

ससुराल जाती है तो परिवार में बच्चों के होने वाले कार्यक्रम में बड़ी हिकारत से देखा जाता है, ऐसा लगता है इस दुनिया के सारे गुनाह कर दिए बच्चा पैदा ना करके ।

वह सोचती है पैसों से दुनिया की हर चीज खरीदी जा सकती है, मंद मंद मुस्कुरा देती है काश की सारी दौलत देकर एक बच्चा अपनी कोख में ला पाती , विचारों की इन्हीं झंझावात में घिरेे हुए कितना टाइम निकल जाता है ,उसे पता ही नहीं पड़ता और नेहा को आते हुए देखती है, 

अंजलि खड़े होकर नेहा को अपनी चेयर पर बैठाती है, उस टाइम सच में ऐसा लगता है, करोड़ों की प्रॉपर्टी की मालकिन असहाय है, डॉक्टर नेहा और अंजलि से कहती है कुछ जरूरी टेस्ट मैंने आप दोनों की कर लिए हैं 

आई होप की नेहा जी आपके लिए गए इस डिसीजन से अंजलि जी की जिंदगी में एक बहुत खूबसूरत सा मोड़ आने वाला है ,शायद उनकी जिंदगी में भी ढेर सारी ईश्वर खुशियां आपके द्वारा लाना चाहता है।

इतने में ड्राइवर रोती हुई रोजी को लेकर अंदर आता है अंजलि दौड़कर उसको अपनी गोदी में लेती है , और नेहा से कहती है अरे अपनी बातों में रोजी को हम भूल ही गए । डॉक्टर रोजी को देखकर , नेहा से कहती है बड़ी प्यारी बच्ची है आपकी ,

नेहा मुस्कुरा देती है, अंजली से रोजी को ले लेती है क्योंकि अंजलि की गोद में रोजी चुप नहीं हो रही थी।

अंजलि कहती है ,हमें निकले हुए काफी टाइम हो गया , अब रोजी का भूख का टाइम हो गया ,हमें चलना चाहिए बाकी बातें मैं आपसे फोन पर कर लूंगी ।

नेहा और अंजलि बाहर आ जाती है, अंजलि नेहा से कहती है पास में ही मदर फूड रेस्टोरेंट है चलो हम वहां चलते हैं , और रोजी के लिए कुछ लेते है, 

नेहा कुछ नहीं कहती क्योंकि उससे भी रोजी का रोना नहीं देखा जा रहा था , और वह दोनों मदर फूड पर जाकर रोजी के लिए कुछ खाने का देखने लगती है दोनों ही ज्यादा कुछ बातें नहीं कर रही थी, शायद वह दोनों समझ नहीं पा रही थी की क्या बातें करें ।




अभी तक आपने पढ़ा नेहा सेरोगेसी मदर के लिए  तैयार हो जाती है और अंजलि और नेहा दोनों डॉक्टर के पास जाती है जहां उनकी कुछ जरूरी टेस्ट  होते है  ।

गतांक से आगे

भाग 6

निर्णय

अंजलि नेहा को घर छोड़ते हुए अपने घर चली जाती है,

नेहा रोज़ी को सुलाते हुए  खुद भी सो जाती है ।

शाम को अंजलि के फोन से उसकी नींद खुलती है अंजलि उससे रोज़ी की तबीयत के बारे में जानती है, कि वहां से आने के बाद इतना रोने के कारण रोजी की तबीयत तो ठीक है ना,

नेहा हां दीदी वह बिल्कुल स्वस्थ है ,आप चिंता ना करिए रोजी अभी सो रही है ।

और थोड़ी सी नॉर्मल बात करने के अलावा अंजलि दूसरे दिन नेहा को घर पर बुलाती है । 

दूसरे दिन 12:00 बजे के करीब बैंक से फोन आता है और बैंक मैनेजर उसे स्टॉलमेंट   जमा करने की बात करता है ,

नेहा उससे कहती है किधर अभी तो कोरोना काल के चलते हुए मेरी जॉब भी नहीं है तो अभी इंस्टॉलमेंट जमा करना मुमकिन नहीं है ,और इस कोरोना में मैंने मेरे हस्बैंड को भी खोया है तो थोड़ा सा मुझे टाइम लगेगा बैंक मैनेजर उसे 1:00 बजे बैंक बुलाता है ।

नेहा बैंक पहुंचती है , नेहा की खूबसूरती सच में आकर्षित करने वाली है , राजेश के मरने के बाद भी नेहा ने बिंदी और बिछिया दोनों ही नहीं उतारे  थे , 

इसलिए जिन्हें यह बात पता थी कि कोरोना में उसकी हस्बैंड की डेथ हो गई है ,वही समझ पाते थे ,बाकी लोगों को वह शादीशुदा ही नजर आती थी ।

बैंक मैनेजर उसे अंदर बुलाता है और उसी रूल रेगुलेशन समझाने लगता है , जो सिर्फ एक जबरदस्ती का बुलाना था , वह नेहा से कहता है की मैडम आपके हस्बैंड ने last 4 months से गाड़ी और मकान का इंस्टॉलमेंट नहीं भरा है

 अगर आप जल्दी ही कुछ नहीं करती हैं तो इन दोनों को नीलाम करना हमारी मजबूरी होगी , नेहा कहती है कि थोड़ा सा समय रुक जाइए मैं आपके इंस्टॉलमेंट रेगुलर कर दूंगी ,

मैडम अगर आप कहें, तो मैं आपकी इंस्टॉलमेंट पर लंबे समय तक  रोक लगवा सकता हूं , लेकिन बैंक मैनेजर की आंखों का मुआयना वह महसूस कर पा रही थी , बैंक मैनेजर रोजी को खिलाने के बहाने उसके शरीर को टच करने की कोशिश कर रहा था ।

वह जल्दी ही कुछ करेगी यह कहते हुए वह वहां से निकल आती है ,लेकिन मन ही मन बहुत दुखी होती है ,और सोचती है की कैसी  दुनिया है किसी के दुख दर्द से कोई लेना-देना नहीं ,इस नश्वर शरीर के आगे कुत्ते की तरह लार टपकाते है ।

     और वह अंजलि के घर पहुंच जाती है , अंजलि रोज़ी को नेहा की गोदी से ले लेती है नेहा का उतरा हुआ चेहरा देखकर अंजलि नेहा से पूछती है कहां से आ रही हो जो इतना अपसेट माइंड नजर आ रहा है ।

थोड़ी ऊंची आवाज में चिल्लाते हुए बोलती है ,कि मैंने अगर अपने मां-बाप की बात मानी होती और राजेश से शादी ना की होती तो मुझे आज यह दिन देखने ना पड़ता , दो कौड़ी का वह बैंक मैनेजर जो है तो एक एंप्लॉय मुझे सिखा रहा था इंस्टॉलमेंट नहीं देने पर क्या होता है ,

और वह मेरी स्टॉलमेंट रोक देगा, अगर मैं उसके लिए अपने घर के दरवाजे खोल देती हूं तो , मेरे शरीर का निरीक्षण ऐसे कर रहा था अपनी पैनी नजरों से जैसे मैंने इस पर कोई लोन ले रखा हो ,

ऐसा लग रहा था जैसे दहकता हुआ कोई लावा फट पड़ा हो और नेहा गुस्से में बिल्कुल लाल नजर आ रही थी ।

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